जन नायकन’ लीक इंडस्ट्री के लिए एक कॉल क्यों ह
जन नायकन’ लीक इंडस्ट्री के लिए एक कॉल क्यों
जहा लीक फ़िल्म बनाने वालों के लिये दुःखदाई साबित हो सकता है,
वहीं रजनी कांत और कमल हसन इसे डिजिटल कंटेंट की सुरक्षा और फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन की कार्य से विषय बना दिया गया है।’जन नायकन’ फ़िल्म इंडस्ट्री शोक में क्यों है? सिनेमा में 2 घंटे की शो नहीं हो सकती है; यह हज़ारों घंटों और सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च होता है। जब जन नायकन थलापति विजय की आखिरी फिल्म क्यों मानी जा रही है ऐसे पहले ऑनलाइन पर यह फिल्म लिखे हो गई तो इसमें इतना मनोरंजन का खास कोई मानता नहीं होगा। यह एक विफलता हो सकती है, जिसने हमारी कला की सुरक्षा हो सकती है।1. आख़िरी परफ़ॉर्मेंस का महत्व क्यों है|थलापति विजय दशकों से तमिल सिनेमा कर रहे हैं। राजनीति में उतरते ही फिल्म की नई घोषणा की सुधारने की शुरुआत कर दी गई हो सकती है| फ़िल्म न रह कर, एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन गई।भावनात्मक महत्व: यह उनका आखिरी शो हो सकता है।आर्थिक महत्व:सिनेमाघरों में दिखाने के अधिकार के लिए रिकॉर्ड तोड़ रक़म चुकाई गई हो सकती हैइस उम्मीद में कि फ़िल्म की शुरुआत ज़बरदस्त हो सकती हैलीक: फोटोस को ऑनलाइन फिल्मों पर लीक करने वाले, ‘पहले दिन, पहले शो’ का जादू छीन लिया गया हो सकता है और फ़िल्म की पूरी आर्थिक संरचना को जोखिम में डाल जा सकता है।2. कमल हसन ने इसे ‘व्यवस्था गत विफलता’ क्यों कहा?उन्होंने सर्टिफ़िकेशन प्रक्रिया में होने वाली देरी की ओर भी इशारा किया है।CBFC की बाधा: यह फ़िल्म महीनों से आगे-पीछे’ की स्थिति में फँसी हुई है।संवेदन शीलता का दौर कोई फ़िल्म जितने लंबे समय तक’ (limbo) की स्थिति में रहती है एडिटिंग रूम, डबिंग स्टूडियो और सरकारी दफ़्तरों के बीच मंज़ूरी के लिए घूमती रहती है—उतने ही ज़्यादा लोग उसकी डिजिटल फ़ाइलों को संभालते हैं।तर्क: यदि यह व्यवस्था ज़्यादा तेज़ी से और ज़्यादा सुरक्षित ढंग से काम करे, तो यह फ़िल्म अब तक सिनेमा घरों में सुरक्षित रूप से प्रदर्शित हो चुकी होती। अर्थशास्त्र: आंकड़ों का खेलजब इस तरह की कोई फ़िल्म लीक होती है, तो इसका नुक़सान सिर्फ़ कलाकार को ही नहीं होता। इसका असर सेट पर काम करने वाले सबसे छोटे कर्मचारी तक पर पड़ता है। समाप्त!








